V3I9P33

बौद्ध धर्म और प्राचीन भारत में सामाजिकसांस्कृतिक परिवर्तन: एक ऐतिहासिक पुनर्विचार

ुकुन्द कुमार1

Abstract

प्राचीन भारत के इतिहास में बौद्ध धर्म का उद्भव ईसा पूर्व छठी शताब्दी में ऐसे ऐतिहासिक परिवेश में हुआ, जब उत्तर भारत में वैदिक-ब्राह्मणीय परंपराओं के साथ-साथ विभिन्न श्रमण परंपराएँ भी सक्रिय थीं तथा सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन घटित हो रहे थे। यह शोध-आलेख बौद्ध धर्म को केवल एक धार्मिक-दार्शनिक परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय समाज में उभरने वाली एक महत्वपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक शक्ति के रूप में पुनर्विचार करता है। लेख में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि बौद्ध धर्म ने जन्म-आधारित सामाजिक प्रतिष्ठा की अपेक्षा नैतिक आचरण और कर्म को महत्त्व देकर तत्कालीन सामाजिक पदानुक्रम को वैचारिक चुनौती दी तथा संघ के माध्यम से एक वैकल्पिक धार्मिक-सामाजिक संस्था का विकास किया। इसी क्रम में भिक्षुणी संघ की स्थापना ने महिलाओं के लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक जीवन में सहभागिता का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। बौद्ध धर्म के विकास के साथ व्यापारिक समुदायों, शहरी केंद्रों और मठ-संस्थाओं के बीच भी महत्वपूर्ण संबंध स्थापित हुए, जबकि स्तूप, चैत्य, विहार, मूर्तिकला, भित्तिचित्र तथा पालि साहित्य ने भारतीय कला एवं सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध किया। सम्राट अशोक के शासनकाल में बौद्ध परंपरा को व्यापक राजकीय संरक्षण प्राप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप इसका प्रसार भारतीय उपमहाद्वीप से आगे श्रीलंका तथा एशिया के विभिन्न क्षेत्रों तक हुआ। तथापि, भारत में बौद्ध धर्म का क्रमिक अवसान एक बहु-कारकीय ऐतिहासिक प्रक्रिया थी, जिसमें मठीय संस्थाओं की बदलती आर्थिक-सामाजिक स्थिति, राजकीय संरक्षण में परिवर्तन, अन्य धार्मिक परंपराओं के साथ अंतःक्रिया तथा मध्यकालीन राजनीतिक-सैन्य परिस्थितियों सहित अनेक कारकों की भूमिका रही। यह अध्ययन बौद्ध धर्म के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव का एक समग्र, अंतःविषयक एवं ऐतिहासिक पुनर्मूल्यांकन प्रस्तुत करता है तथा समता, करुणा, नैतिकता और सामाजिक सह-अस्तित्व जैसे इसके मूलभूत विचारों की समकालीन प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है।

Keywords:

बौद्ध धर्म, सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन, जाति व्यवस्था, संघ, भिक्षुणी,  ब्राह्मणवाद, प्राचीन भारत, सामाजिक समता, बौद्ध कला, श्रमण परंपरा, नालंदा महाविहार।